रस्ता यहीं कहीं था वो कूचा यहीं कहीं
छूटी थी मेरे हाथ से दुनिया यहीं कहीं
छूटी थी मेरे हाथ से दुनिया यहीं कहीं
लाया है तेरी आस का नक़्शा यहीं कहीं
“इक हादसा भी ताक में होगा यहीं कहीं”
मैंने बना लिया है ग़ज़ल को ही अपनी क़ब्र
मेरे बदन का दफ़्न है मलबा यहीं कहीं
मनहूसियत रही है टपक आसमान से
कोई तो करता रहता है गिरिया यहीं कहीं
भीगा हुआ है अश्क से सहरा का रोम रोम
बहता है मेरी प्यास का दरिया यहीं कहीं
इस मोड़ पर रहें हैं बिखर तेरे नक़्शे-पा
डूबेगा मेरा आख़िरी रस्ता यहीं कहीं
बुनती है फिर तिलिस्म कोई चश्मे-नीम ख़ाब
दिखता है मुझको आपका चेहरा यहीं कहीं
इक शख़्स ने दिखाया था मुझको वो मेरा घर
उलझा था मेरे पाँव से रस्ता यहीं कहीं
देखो न सारी राह ही फूलों से भर गयी
चूमा था मेरे पाँव ने काँटा यहीं कहीं
दिनेश नायडू
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