रेज़ा रेज़ा हुआ जाता हूँ तो चीख़ा मत कर
ये सभी तेरी इनायात हैं गिरिया मत कर
अप-शकुन होता है आवाज़ लगाना ऐसे
जाने वाले को कभी पीछे से रोका मत कर
ये तिजारत तुझे बर्बाद न कर दे मेरे दोस्त
अपने हक़ का सरे-बाज़ार तक़ाज़ा मत कर
तेरी हर बात सुनी सब्र से तो मैं ने हयात !
अब मुझे बोलने दे, बीच में टोका मत कर
मुझको आदत नहीं हो जाय कहीं फिर तेरी
पास आकर तू दिले-ज़ार को अच्छा मत कर
डूब जाऊँ ना किसी ख़स्ता सफ़ीने की तरह
ऐ मेरे अब्रे-रवाँ टूट के बरसा मत कर
मेरे दामन पे कोई दाग़ न आए क़ातिल
जान से मार दे पर तू मुझे रुसवा मत कर
क्या पता कोई सितारों से उतर जाय दिनेश
तू कभी अपनी निगाहों को बुझाया मत कर
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