मिन्नतो-नाला-ओ-बुका करके
मुन्तज़िर हूँ उसे सदा करके
मुन्तज़िर हूँ उसे सदा करके
दिल को पड़ता नहीं है तुझ बिन चैन
मैंने देखा है क्या न क्या करके
ख़ुदकुशी ही तो की है मैंने दोस्त
जीते रहने का फ़ैसला करके
उसकी दुनिया में रंग भरता हूँ
अपनी दुनिया को मैं फ़ना करके
ज़िन्दगी बुझ गयी ख़लाओं में
मेरे हर ख़्वाब को हवा करके
इश्क़ में तज्रबा नहीं चलता
“हमने देखा है तज्रबा करके”
उसकी आग़ोश में थी लाश मेरी
लौट आया मैं फ़ातिहा करके
जो भी होना है वो तो होगा मगर
दिल बहल जाता है दुआ करके
दिनेश नायडू
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