आंसुओं को कभी इंकार नहीं कर पाया
मैं दिले-ज़ार को बेज़ार नहीं कर पाया
मैं दिले-ज़ार को बेज़ार नहीं कर पाया
दोस्ती उसकी मुहब्बत से भी प्यारी थी मुझे
इश्क़ करता रहा इज़हार नहीं कर पाया
बात रखने की जसारत तो कभी कर भी ली
मैं वो बेटा था जो इसरार नहीं कर पाया
उम्र भर साथ मयस्सर रहा है तेरा पर
अब ये लगता है तुझे प्यार नहीं कर पाया
बस किनारे पे बनाता रहा कश्ती अपनी
इश्क-मँझधार कभी पार नहीं कर पाया
देखता रह गया मिटते हुए दुनिया अपनी
एक उम्मीद को मिस्मार नहीं कर पाया
झूठ कहता रहा ख़ुद से भी ज़माने से भी
जुर्म करता रहा इक़रार नहीं कर पाया
क्या पता कौन सी मिट्टी का बना है ये दिल
इस ख़राबे को मैं गुलज़ार नहीं कर पाया
मैंने सोचा था कि डर से मैं निबट लूंगा दिनेश
वार करना था.... मगर वार नहीं कर पाया
दिनेश नायडू
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