ये मेरा ख़ाब सा जो घर है दोस्त
हो रहा बिन तेरे जर्जर है दोस्त
हो रहा बिन तेरे जर्जर है दोस्त
अपने ख़ाबों की अधूरी दुनिया
अब हक़ीक़त से भी बदतर है दोस्त
ख़ाक होने की हैं साँसें तनख़्वाह
ज़िंदगी मौत का दफ़्तर है दोस्त
जिसको तुम ढूँढ रहे हो हर सम्त
दश्त वो मेरे ही अंदर है दोस्त
शेर लाई है नया शामे-फ़िराक़
आपका दर्द मुकर्रर है दोस्त
मैंने ही कर दिया है ख़ुद को तर्क
भूल जाना मुझे बेहतर है दोस्त
भर भी सकता है तेरा ज़ख़्म इक दिन
बस इसी बात का तो डर है दोस्त
मैं वही दोस्त हूँ तेरा जानी
जो भी कुछ है तेरे भीतर है दोस्त
कोई ख़तरा नहीं है उससे 'दिनेश'
दुश्मने-जाँ है मेरा, पर है दोस्त
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