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Saturday, June 28, 2025

मेरा बयान मेरी ज़िन्दगी का नाला है

बदन बदन नहीं है अश्क का पियाला है 
सहर का रंग मेरे आसमाँ में काला है 

मैं क्या कहूँ की टूट जाती है मेरी आवाज़ 
मेरा बयान मेरी ज़िन्दगी का नाला है 

वफ़ा मिटा नहीं सकेगी बेवफ़ाई भी 
कभी नहीं खुलेगा जो ज़बाँ पे ताला है

हर एक शै से चीख़ता है मुझ पे सन्नाटा 
उदासियों का मेरे घर में बोलबाला है

मचा हुआ है मेरे दिल में शोर मातम का 
तेरी ख़ामोशियों ने मुझको तोड़ डाला है 

समय के साथ चश्मे-तर भी सूख जायेगी 
ये ओस आख़िर एक सुब्ह का निवाला है 

चमक रही है मेरी राख सुर्ख़ रंगों में 
तुम्हारी तीरगी ने कर दिया उजाला है 

घड़ी घड़ी हंसा रही है हमको मजबूरी 
हमारी ख़स्तगी का तौर भी निराला है

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