Translate

Saturday, June 28, 2025

मगर मैं ख़ुश हूँ तुम्हारी झूठी तसल्लियों से

निकलता रहता है एक आहंग उदासियों से 
किसी का नौहा सुनाई देता है सिसकियों से 

हमारे ग़म से पिघल रहा है ये शोरे-आलम
ग़ज़ल हमारी दहक रही है ख़मोशियों से 

बड़े मज़े में गुज़रने वाली है शाम तन्हा
मैं ढूंढ लाया हूँ इक उदासी उबासियों से

मुझे पता है कि अपना रिश्ता नहीं बचेगा 
मगर मैं ख़ुश हूँ तुम्हारी झूठी तसल्लियों से 

सवाल अपने बदल चुका हूँ मैं तल्ख़ियों में
मिटा चुका हूँ मैं अपनी दुनिया तुम्हारे क्यों से

अब आँसुओं की हसीन महफ़िल सजी हुई है
रुला रहा हूँ मैं सबको अपनी कहानियों से

मुझे दुबारा बुला रही है वो सूनी राहें 
मैं फिर से पर्दा हटाने वाला हूँ खिड़कियों से 

अभी तो मेहंदी रची नहीं है हथेलियों में
अभी से वो चाँद मिट गया है हथेलियों से

मैं तेरे दर से अब अपना मलबा हटा रहा हूँ 
कोई भी रिश्ता रहे न तेरा तबाहियों से

No comments:

Post a Comment