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Friday, April 18, 2025

ज़िन्दगी ! हाल सुनाओ अपना

वक़्त ने कैसे तिलिस्मात किए 
जितने भी दिन थे मेरे रात किए  

ज़िन्दगी ! हाल सुनाओ अपना 
एक मुद्दत हुई है बात किए 

ख़ोखला हो गया हूँ पूरा मैं 
तुमने घायल मेरे जज़्बात किए

क्या कभी आएगी वो बादे-सबा 
कितने सावन हुए बरसात किए 

जाने किस धुन में गँवा दी दुनिया 
फिर भी यारों नशे दिन-रात किए 

हम भटकते है तेरे सहरा में 
दश्ते-तन्हाई को हमज़ात किए

दिनेश नायडू

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