उसके आने के ज़माने नहीं हो पाए कभी
हमसे जीने के बहाने नहीं हो पाए कभी
हमसे जीने के बहाने नहीं हो पाए कभी
बेरुख़ी से तेरी छतनार शजर सूख गए
हम नए लोग पुराने नहीं हो पाये कभी
अपने ख़ेमे की हिफाज़त में लगे रहते हैं
यार ये लोग घराने नहीं हो पाए कभी
वो किसी ख़ाब के मानिंद सजा रहता है
हम हक़ीक़त से फ़साने नहीं हो पाए कभी
थकते जब हैं तो सड़क ओढ़ के सो जाते हैं
शहर में अपने ठिकाने नहीं हो पाए कभी
शेर दर शेर तुझे नज़्म तो हम करते रहे
जमअ पर तेरे ख़ज़ाने नहीं हो पाए कभी
थाम तो हाथ लिया पोंछे भी आंसू मेरे
पर जहां रो ले वो शाने नहीं हो पाए कभी
फिर कोई अपना ही आयेगा हमारी ज़द में
हमसे औरों पे निशाने नहीं हो पाये कभी
तेरे आने से भी अब लगता है बदलेंगे नहीं
दिल के मौसम जो सुहाने नहीं हो पाए कभी
घर की दहलीज़ कभी पार नहीं कर पाये
हम से आशिक़ तो दिवाने नहीं हो पाए कभी
अपनी ग़लती को छुपाने की नहीं की कोशिश
हम 'दिनेश' इतने सियाने नहीं हो पाए कभी
दिनेश नायडू
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