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Thursday, April 3, 2025

कभी तो बात निकलेगी कहीं से

अभी आवाज़ आई है कहीं से 
कि कुछ बनने लगा है कुछ नहीं से 

इसी सहरा में जन्मी तिश्नगी थी 
सो अब निकलेगा दरिया भी यहीं से

तेरी ख़ामोशियों को सुन रहे हैं 
कभी तो बात निकलेगी कहीं से 

जहां भी हमने सोचा कुछ नहीं है 
उभर आया तेरा चेहरा वहीँ से

तुम्हारी हाँ से मुश्किल बढ़ गई है 
हमारा काम बन जाता नहीं से 

उदासी ने जटाएं खोल दी हैं  
अभी फूटेगी गंगा भी यहीं से

दिनेश नायडू

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