अभी आवाज़ आई है कहीं से
कि कुछ बनने लगा है कुछ नहीं से
कि कुछ बनने लगा है कुछ नहीं से
इसी सहरा में जन्मी तिश्नगी थी
सो अब निकलेगा दरिया भी यहीं से
तेरी ख़ामोशियों को सुन रहे हैं
कभी तो बात निकलेगी कहीं से
जहां भी हमने सोचा कुछ नहीं है
उभर आया तेरा चेहरा वहीँ से
तुम्हारी हाँ से मुश्किल बढ़ गई है
हमारा काम बन जाता नहीं से
उदासी ने जटाएं खोल दी हैं
अभी फूटेगी गंगा भी यहीं से
दिनेश नायडू
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