जितने भी थे ज़हन में किरदार, कामिल हो गए
ऐ कहानीकार! हम तो तेरे क़ाइल हो गए
ऐ कहानीकार! हम तो तेरे क़ाइल हो गए
भूख का पल्ला बहुत वज़्नी रहा किरदार पर
धीरे-धीरे हम भी इस दुनिया में शामिल हो गए
सोचता रहता हूँ मुझसे क्या हुआ होगा गुनाह
कैसे मुझको चाहने वाले ही बे-दिल हो गए
रफ़्ता-रफ़्ता दोस्ती में भी तकल्लुफ़ बढ़ गया
सब लड़कपन के हमारे यार आक़िल हो गए
ख़ुद से भी नजरें झुकाये मिलते हैं हम आजकल
इक अना के टूटने से इतने बुज़दिल हो गए
सीधी बातों को घुमा कर बोलना आया नहीं
अपनी आसानी के कारण सबकी मुश्किल हो गए
साहिबो! इक उम्र के वनवास से लौटे हैं हम
यूँ ही इक पल में नहीं दुनिया से ग़ाफ़िल हो गए
जो भी संजीदा हुए वो खो गए तारीख़ में
शोर जो करने लगे वो जाने-महफ़िल हो गए
हमको कड़वाहट लगी शीरीं ज़ुबाँ तहज़ीब की
इसलिए आदाबे-ख़ामोशी में दाख़िल हो गए
आंसुओं की झील में हमने डुबो दी ज़िन्दगी
और सराबों की तरह सहरा को हासिल हो गए
अपने कुनबे से निकाले जा रहे हैँ हम 'दिनेश'
लग रहा है दोस्तो उड़ने के क़ाबिल हो गए
दिनेश नायडू
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