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Tuesday, March 25, 2025

रौशनी रौशनी नहीं होती

ज़िंदगी ज़िंदगी नहीं होती 
इन दिनों शाइरी नहीं होती 

मुझमें ठहरी है इक अँधेरी रात 
जो कभी चांदनी नहीं होती 

काश दुनिया को देख पाते हम 
काश उसकी गली नहीं होती

सिर्फ़ जादूगरी है आँखों की
रौशनी रौशनी नहीं होती 

क़ैद रहता हूँ अपने जंगल में 
मुझसे आवारगी नहीं होती

जिस्म में लौटना ही पड़ता है 
बेख़ुदी दाइमी नहीं होती  

कोई हँसता है कोई रोता है 
जिंदगी एक सी नहीं होती

और तो कोई दुःख नहीं होता 
इतना दुःख है, ख़ुशी नहीं होती

दिनेश नायडू

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