Translate

Tuesday, March 25, 2025

कोई मेरा निशान है ही नहीं

ज़ख्म तो है, निशान है ही नहीं 
दर्दे-दिल का निदान है ही नहीं 

जिस्म की बेकराँ ख़लाओं में
कोई मेरा निशान है ही नहीं

कौन टूटेगा मेरी दुनिया पर
अब यहाँ आसमान है ही नहीं

क्या कहूं दिल पे क्या गुज़रती है  
मेरे दुःख का बयान है ही नहीं

हो गए इतना दूर हम तुमसे
अब कोई दरमियान है ही नहीं

लम्हा-लम्हा गुज़र रहा हूँ मैं
ज़िन्दगी को गुमान है ही नहीं 

सांस का शोर था या मन का शोर
ध्यान आया कि ध्यान है ही नहीं

एक टुकड़ा है दश्त का जीवन
सोचिये तो जहान है ही नहीं

इक नफ़स पहले सांस बोझिल थी
अब तो जैसे थकान है ही नहीं

दिनेश नायडू

No comments:

Post a Comment