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Monday, February 10, 2025

अगर नहीं है मुहब्बत तो बोल दो नहीं है

किसी के दिल ने दिया जो बयान वो नहीं है
कि दिल सा झूठा कोई दास्तानगो नहीं है

मैं अपने पास रखी चीज़ें भूल जाता हूँ
उसी को ढूंढने लगता हूँ पास जो नहीं है

बस एक बूँद ही काफ़ी है आग देने को 
अब आँसुओं की ज़रूरत अलाव को नहीं है 

सितारे टाँकती रहती हैं झील में पलकें  
सियाह शब से नज़र नाउमीद तो नहीं है

सराब बनते ही रहते हैं दिल के सहरा में
अगरचे सामने चेहरा है, मान लो नहीं है 

हमारी जान चली जायेगी इस उलझन में
अगर नहीं है मुहब्बत तो बोल दो नहीं है

वो इतना खुल के नहीं मिलता था कभी पहले
मुझे लगा था वो शायद उदास हो, नहीं है

दिनेश कैसे ख़राबों में तुम भटकते हो
कहीं ये राहे-सुख़न राहे-हश्र तो नहीं है

दिनेश नायडू

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