Translate

Thursday, February 6, 2025

ख़ुद अपने ख़ाब का बिखरा हुआ ग़ुबार हूँ मैं

ख़िज़ाँ नसीब हूँ प्यारे गई बहार हूँ मैं 
मगर किसी की फ़िज़ाओं में बरक़रार हूँ मै

लहू लहू हुआ जाता है आसमाँ सारा  
ख़ला में डूबती शामों के आर पार हूँ मैं

वो है तराना मेरे दिल की सर्द आहों का
और उसकी धुन में सिसकता हुआ गिटार हूँ मैं

धुंआ धुंआ नज़र आता है मुझको चारों ओर
ख़ुद अपने ख़ाब का बिखरा हुआ ग़ुबार हूँ मैं

उफनता आब पहाड़ों को काट सकता है  
अगर वो संग है, आँसू की तेज़ धार हूँ मैं 

मैं घर के दरके हुए हिस्सों को बचा न सका
ख़ुद इसकी नींव में आई हुई दरार हूँ मैं

सहर की किरनें बिखरने लगी हैं काग़ज़ पर 
सुलगते ख़ाब सी रातों का चित्रकार हूँ मैं

मैं अपनी चाक़ पे मिट्टी घुमाता रहता हूँ  
न जाने कौन सी मूरत का शिल्पकार हूँ मैं 

यहीं पे बैठकें लगती थी मेरे यारों की 
अब इस गली से गुज़रता कभी कभार हूँ मैं
 
तुम्हारे जिस्म की दहलीज़ तक पहुँच तो गया   
पर अपनी भूल पे हर लम्हा शर्मसार हूँ मैं 

कुछ इसलिए भी निशाने पे हूँ मैं दुनिया के 
दिलों की फ़ौज का इकलौता शहसवार हूँ मैं 

तुम्हारी याद में उलझी हुई है तन्हाई 
और उसके होंठ पे रक्खा हुआ सिगार हूँ मैं 

समेट रक्खा था मुझको रफ़ू के धागों ने 
ये ज़ख्म सूख रहे हैं तो तार तार हूँ मैं
 
मुसाफ़िरों का हुजूम आ रहा है मेरे साथ  
तुम्हारे घर की तरफ आती रहगुज़ार हूँ मैं 

मुझे "दिनेश" तलाशा बहुत उदासी ने
कई दिनों से मेरी क़ैद से फ़रार हूँ मैं

दिनेश नायडू

No comments:

Post a Comment