ख़िज़ाँ नसीब हूँ प्यारे गई बहार हूँ मैं
मगर किसी की फ़िज़ाओं में बरक़रार हूँ मै
मगर किसी की फ़िज़ाओं में बरक़रार हूँ मै
लहू लहू हुआ जाता है आसमाँ सारा
ख़ला में डूबती शामों के आर पार हूँ मैं
वो है तराना मेरे दिल की सर्द आहों का
और उसकी धुन में सिसकता हुआ गिटार हूँ मैं
धुंआ धुंआ नज़र आता है मुझको चारों ओर
ख़ुद अपने ख़ाब का बिखरा हुआ ग़ुबार हूँ मैं
उफनता आब पहाड़ों को काट सकता है
अगर वो संग है, आँसू की तेज़ धार हूँ मैं
मैं घर के दरके हुए हिस्सों को बचा न सका
ख़ुद इसकी नींव में आई हुई दरार हूँ मैं
सहर की किरनें बिखरने लगी हैं काग़ज़ पर
सुलगते ख़ाब सी रातों का चित्रकार हूँ मैं
मैं अपनी चाक़ पे मिट्टी घुमाता रहता हूँ
न जाने कौन सी मूरत का शिल्पकार हूँ मैं
यहीं पे बैठकें लगती थी मेरे यारों की
अब इस गली से गुज़रता कभी कभार हूँ मैं
तुम्हारे जिस्म की दहलीज़ तक पहुँच तो गया
पर अपनी भूल पे हर लम्हा शर्मसार हूँ मैं
कुछ इसलिए भी निशाने पे हूँ मैं दुनिया के
दिलों की फ़ौज का इकलौता शहसवार हूँ मैं
तुम्हारी याद में उलझी हुई है तन्हाई
और उसके होंठ पे रक्खा हुआ सिगार हूँ मैं
समेट रक्खा था मुझको रफ़ू के धागों ने
ये ज़ख्म सूख रहे हैं तो तार तार हूँ मैं
मुसाफ़िरों का हुजूम आ रहा है मेरे साथ
तुम्हारे घर की तरफ आती रहगुज़ार हूँ मैं
मुझे "दिनेश" तलाशा बहुत उदासी ने
कई दिनों से मेरी क़ैद से फ़रार हूँ मैं
दिनेश नायडू
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