ठुकरा जाना दुनिया से वरदान हुआ
देखो सहरा में मेरा गुनगान हुआ
देखो सहरा में मेरा गुनगान हुआ
फेरों की वेदी पर छोड़ आया मैं ख़ाब
मेरी उम्मीदों का कन्यादान हुआ
हर कोई ख़ुद में ही तनहा रहता है
इतनी भीड़ है शह्र में सब सुनसान हुआ
अपने जिस्म का मलबा समेटे बैठा हूँ
दिल का होना तो कोई तूफ़ान हुआ
तुम तो कई दिन पहले चले गए होगे
बैठे बैठे इक दिन मुझको ध्यान हुआ
कैसे मेरी ग़ज़लों में रौशनी आएगी
इस बस्ती का हर मंज़र वीरान हुआ
काश नहीं होता ज़िन्दाँ में रोशनदान
दिल बुझती हसरत का रेगिस्तान हुआ
तीन क़दम धरती का दान मिला मुझको
यानी सुल्तानों का मैं सुल्तान हुआ
मैं तो ध्यान में था मुझको मालूम नहीं
इक पत्थर का टुकड़ा कब भगवान हुआ
बस अपने मन का ही दिनेश न कर पाए
वर्ना इस दुनिया में हमसे क्या न हुआ
दिनेश नायडू
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