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Friday, January 17, 2025

जाने कब ये बिरह जाएगा

इक दिन सब कुछ ढह जाएगा 
तेरा होना रह जाएगा 

उस तक जाता कच्चा रस्ता 
इस बारिश में बह जाएगा 

दीवारो दर उठ जाएंगे 
आँगन सिमटा रह जाएगा 

आँधी आएगी यादों की 
और खंडर दिल ढह जाएगा

दुनिया तो मिट भी सकती है
जाने कब ये बिरह जाएगा

दिल की बातों का मत पूछो
दिल तो हर ग़म सह जायेगा

सन्नाटा मेरी हालत को
ख़ामोशी से कह जाएगा

दिनेश नायडू

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