जो भी चाहा है कहाँ होता है
जो न होना था मियां होता है
जो न होना था मियां होता है
कुछ नहीं होता अगर मर जाते
ज़िंदा रहने में ज़ियाँ होता है
दिल न जलता तो ख़मोशी होती
जल रहा है तो धुआँ होता है
मलबा लगता है कई ख़ाबों का
तब कहीं जा के मकाँ होता है
दिल धड़कता है बहुत तेज़ी से
हर घड़ी तेरा गुमां होता है
हाथ सीने प धरा और कहा
दर्द होता है यहाँ होता है
ज़र्द पड़ जाते हैं होठों के गुलाब
इश्क़ में रंगे ख़िज़ाँ होता है
वक़्त देता ही नहीं है मुझको
जब भी पूछो तो फ़ुलाँ होता है
क्या मुसीबत है कि मेरा हर ग़म
मेरे होने में निहाँ होता है
ऐसी चाहत है तेरे ग़म की मुझे
जैसे प्यासे को कुआं होता है
गुनगुनाती है तुम्हारी यादें
और दिल रक्सकुनाँ होता है
उसकी मर्ज़ी है मुझे गाली दी
सबका अंदाज़े बयाँ होता है
दिनेश नायडू
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