पहले तो उसकी याद ने तनहा किया मुझे
फिर रफ़्ता रफ़्ता और भी उसका किया मुझे
मैं इक उदास शहर की मायूस रात था
उसके बदन की धूप ने उजला किया मुझे
मैंने तो उसके ख़ाब में काटी है ज़िन्दगी
फिर कैसे उसके लम्स ने तनहा किया मुझे
मिटते चले गये मेरी दुनिया से मेरे नक्श
तेरी तलब ने हू ब हू तुझसा किया मुझे
मैंने भी उसका नाम सभी को बता दिया
यारो! उदास शाम ने जब वा किया मुझे
मुझ पर जुनूँ सवार था प्यारे सुखन की शाम
ग़ज़लों के इंतिख़ाब ने रुस्वा किया मुझे
मैं दर ब दर भटकता रहा उसकी खोज में
दरिया की जुस्तजू ने ही सहरा किया मुझे
कैसे तमाम शहरों में आऊंगा मैं दिनेश
गोया! हर एक शख्स पुकारा किया मुझे
दिनेश नायडू
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