और तू इस बात से अँजान है
आदतन मैं बोलता कुछ भी नहीं
बेनियाज़ी ही मिरा ऐलान है
हाँ मुझे मालूम है हूँ बदगुमाँ
इसलिए तो ज़िन्दगी आसान है
क्या मेरी आंखों से कुछ ज़ाहिर नहीं
क्या मेरा क़ातिल बहुत नादान है
तू नहीं तो क्या हुआ, कुछ भी नहीं
ज़िन्दगी आसान थी , आसान है
लोग क्यूँ जीते हैं फ़ानी हसरतें
मेरी बर्बादी मुझे वरदान है
चीखता रहता है सहरा किस लिये
क्या सराबों में कोई इंसान है
दिनेश नायडू
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