शब से लड़ने का इरादा उम्र भर मेरा भी है
दश्त में , सहरा में ,गर्दे-रहगुज़र में ,ख़ाक में
वहशतों से वहशतों का इक सफ़र मेरा भी है
उम्र भर ख़ानाबदोशी , हर क़दम आवारगी
याद तक आता नहीं क्यों कोई घर मेरा भी है
एक दरिया की तरह चढ़ती रही है ज़िन्दगी
मैं हूँ कश्ती का मुसाफ़िर, ये हुनर मेरा भी है
चाँद से इतरा के कल शब एक जुगनू ने कहा
रौशनी का एक लम्हा मुख़्तसर मेरा भी है
जैसे सहरा हो गयीं हैं मेरे मन की वुसअतें
कैसे मानेगा कोई इसमें बसर मेरा भी है
बदगुमानी, बेतमीज़ी, बेसलीक़ा, बेअदब
अब नहीं है काम का ये दिल अगर मेरा भी है
दिनेश नायडू
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