बस यूँ ही ...
"दिनेश नायडू की कुछ ग़ज़लें और नज़्में "
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Friday, April 17, 2020
हुआ दिल जैसा मेरे मोजज़ा तो
हुआ दिल जैसा मेरे मोजज़ा तो
बिना घी के दिया जलता रहा तो
मैं कब का हार जाता ज़िन्दगी से
अगर हद से जियादा सोचता तो
जो घर बाहर से पक्का कर रहे हो
वो अन्दर से ही निकला खोखला तो
ये बच्चा तोड़ देता हर खिलौना
अगर इनकी हक़ीक़त जानता तो
दिनेश नायडू
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