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Friday, April 17, 2020

था मेरी ज़िन्दगी में मौत सा क्या ?


था मेरी ज़िन्दगी में मौत सा क्या
मैं सारी उम्र फिर जीता रहा क्या

मिरे अन्दर बला का शोरो-गुल है
मिरे अन्दर कोई है चीखता क्या

ग़मों की बाढ़ कैसी आ गयी है
तमन्नाओं का बादल फट गया क्या

मैं कितनी बार ठहरा जाते-जाते
तुम्हें आता नहीं था रोकना क्या

मुझे उससे शिकायत क्यूँ है इतनी
बस इक वो ही हुआ है बेवफा क्या

तुम्हे पाना तो मुमकिन था नहीं पर
तुम्हे खोया तो कुछ भी पा सका क्या

दिनेश नायडू (१६ सितम्बर,२०१२)

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