बाग़ बग़ीचा रंगीला सा सन्नाटा
एक नदी ने राह बदल ली है अपनी
गाँव में अब है पथरीला सा सन्नाटा
मेरे बाहर है दुनिया भर की जगमग
मेरे अंदर है पीला सा सन्नाटा
पहले तो चीख़ों का कोई दौर चला
अब है मन में बर्फ़ीला सा सन्नाटा
बारिश होती रहती है मेरे अंदर
या फिर होता है सीला सा सन्नाटा
क्या मंज़र है तेरे बिन वीरानी का
आँख में चुभता है कीला सा सन्नाटा
गुज़रे दिन की लाली ले कर आता है
शाम के रुख़ पर भड़कीला सा सन्नाटा
बर्फ़ की सिल्ली जैसे दिल के अंदर हो
ऐसा है ये बर्फ़ीला सा सन्नाटा
दिनेश नायडू
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