Translate

Friday, April 17, 2020

उसे सम्भालो जो आंसू बहाने वाला है


दबा हुआ मिरे सीने में जो ये नाला है
तमाम शहर में सैलाब लाने वाला है

उसे बता दो जो दीपक जलाने वाला है
सियाह रात का हर एक रंग काला है

भले चमक तो रहा है अभी फ़लक पर वो
मगर ये शम्स किसी रात का निवाला है

वही है जिसने मुझे उम्र भर किया बर्बाद
वही है जिसने मुझे उम्र भर सम्भाला है

ये तेरी रौनक़ें हैं या है मेरा अंधापन
अँधेरा है कि तिरे शह्र में उजाला है

फ़ज़ा में कितनी नमी आ गयी है क्या बोलूं
उसे सम्भालो जो आंसू बहाने वाला है

गली में आ गया हूँ तेरी और बैठा हूँ
मेरे लिए यही मस्जिद यही शिवाला है

कई दिनों से मैं घर में बहुत अकेला हूँ
बस एक चाय है और एक ये रिसाला है

वो जो दिवाना सा लड़का था इश्क़ में पागल
अब उसने अपनी मुहब्बत को मार डाला है

नहीं है कोई जो इस घर की देख-भाल करे
है धूल फ़र्श पे दीवार पर भी जाला है

दिनेश नायडू

No comments:

Post a Comment