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Friday, April 17, 2020

ख़ाब पे कैसे पहरा दूं


रात ! नया सन्नाटा दूं ?
ज़ख़्म हरा है दिखला दूं

अपनी सूरत देखी है
आईने, आईना दूँ

किसको इश्क़ के सौदे में
दिल सा खोटा सिक्का दूं

कितने दिन बाद आया है
ग़म को कैसे लौटा दूं

क्यूँ रिश्तों की गाड़ी को
केवल मैं ही धक्का दूं

भूलूँ तेरी ख़ता कब तक
कब तक ख़ुद को धोखा दूं

रोज़ाना आ जाते हो
ख़ाब पे कैसे पहरा दूं

दिनेश नायडू

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