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Friday, April 17, 2020

कोई रहता है मुझमें जो तन्हा हो गया है



उसे देखा नहीं है ज़माना हो गया है
मेरी दुनिया में जैसे अंधेरा हो गया है

वो जो मुर्दा नहीं था मिरे अंदर का शायर,
तुम्हारी याद आयी तो ज़िंदा हो गया है

कोई फिर याद बन कर चला आया है मुझमे
मेरी बेचैनियों में इज़ाफ़ा हो गया है

अब अपना मौन तोड़ो, कोई तो बात छेड़ो
मेरे खाबो ख़यालो तुम्हे क्या हो गया है

यहीं फूटा था यारो मेरी आँखों से चश्मा
यहीं सहरा था पहले जो दरिया हो गया है

मैं उसका नाम ले कर उलझता ख़ुद से क्यों हूँ
ये कैसा रंज मुझमें इकट्ठा हो गया है

मुझे घेरे हुए हैं किसी की सर्द आहें
कोई रहता है मुझमें जो तन्हा हो गया है

हमें घर छोड़ने का भला ग़म कोई क्यूँ हो
मुकम्मल दश्त देखो हमारा हो गया है

ज़रा सा ज़िक्र उसका बहुत है इस ज़मीं पर
मिरा ये शेर देखो मुरस्सा हो गया है

दिनेश नायडू

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