शम्म भी बुझ रही है आंसू से
कैसे लिख पाउँगा तुम्हारा नाम
डायरी भर चुकी है आंसू से
मेरे अंदर जो चुप थी तन्हाई
आज कल बोलती है आंसू से
अब्र का ग़म किसी ने क्या जाना
झील, दरिया, नदी है आंसू से
मैं उसे कब का खो चुका होता
बात बनती रही है आंसू से
ये धुंआ ज़िन्दगी का है यारो
मेरी सिगरेट जली है आंसू से
लफ्ज़ में वरना कोई मानी क्या
शाइरी शाइरी है आंसू से
मैं अकेला कभी नहीं रहता
अब मिरी दोस्ती है आँसू से
दिनेश नायडू
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