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Monday, March 2, 2026

मैं हँस रहा हूँ मेरी जाँ ..कमाल है मेरा

मैं हँस रहा हूँ मेरी जाँ ..कमाल है मेरा
वगरना इश्क़ में जीना मुहाल है मेरा

तेरी तलब तेरे चेहरे में ढल गई है अब 
ये हिज्र.. हिज्र नहीं है विसाल है मेरा 

कभी कभार मेरा हाल पूछ लेते हो
बस एक तुम हो कि जिसको ख़याल है मेरा 

मैं जंग जीत चुका हूँ फ़ुज़ूल ख़ाबों से 
ग़मे-हयात ग़नीमत का माल है मेरा 

हर एक फ़र्द मेरे आँसुओं में रोता है 
तमाम दहर पे रंगे-मलाल है मेरा

तेरे बग़ैर गुज़रता है कैसे इक इक पल 
मैं क्या बताऊँ की अब जी निढाल है मेरा

तमाम दोस्त जुदा हो गये इक इक कर के 
मेरा उरूज ही शायद जवाल है मेरा 

जवाब दे दिया फ़ौरन मुझे 'दिनेश' मगर 
सुना किसी ने नहीं जो सवाल है मेरा

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