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Friday, July 11, 2025

तेरे बीमार हुए जाते हैं

हुक्म-बरदार हुए जाते हैं 
तेरे बीमार हुए जाते हैं 

अब तेरे बिन मेरे फुर्सत के पल 
ग़म का त्यौहार हुए जाते हैं 

बेल और पेड़ मेरे आँगन के
दरो-दीवार हुए जाते हैं 

आख़िरश मेरे सभी चारा-गराँ
मुझसे बेज़ार हुए जाते हैं 

जान जाती नहीं है क्यूँ मेरी 
वार पर वार हुए जाते हैं 

राह तकने की है आदत ऐसी 
आँख में ख़ार हुए जाते हैं 

दोस्त को छोड़िए अब दुश्मन भी
मेरे ग़म-ख़्वार हुए जाते हैं

तेरी दुनिया को बनाने में हम 
दोस्त! मिस्मार हुए जाते हैं
 
दिनेश नायडू 

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