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Wednesday, March 5, 2025

इक और शब मिली गहरी शबे-सियाह के बाद

पिघल गया हूँ मैं यारो बस इक निगाह के बाद
लगा रहा हूँ गले उसको एक माह के बाद

उसी का ख़ाब मुझे रात भर डराता है
जिसे मैं देख नहीं पाया था गुनाह के बाद

सभी ने मुझको गुनहगार मान रक्खा है
गवाह और भी आएंगे इस गवाह के बाद

मदद को चीख़ रही होगी राह की वो भीड़
मुझे न होश रहा आख़िरी कराह के बाद

बिखर के जुड़ते हुए टूट कर बिखरना पड़ा
इक और शब मिली गहरी शबे-सियाह के बाद 

ज़रा भी फ़र्क़ नहीं पड़ता है ज़माने को
बस एक बाप ही जलता है आत्मदाह के बाद

विरह का रंग उतर जाएगा मेरे दिल से
ग़ज़ल का लहजा बदल जाएगा विवाह के बाद

मैं ख़ुद भी जान नहीं पाता इसकी गहराई
समझ में आया मुझे शेर वाह-वाह के बाद

दिनेश नायडू

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