गर्द-रंगों से मेरी दुनिया को हर-सू भर गया
इक बगूला कल मेरी आंखों में बालू भर गया
इक बगूला कल मेरी आंखों में बालू भर गया
रात की तारीकियाँ तो और गहरी हो गईं
कोई आँखों में नए ख़्वाबों के जुगनू भर गया
एक दस्तक, एक आहट सी हुई मुझमें कहीं
और मन मंदिर की ख़ामोशी में बस तू भर गया
दिल के कमरे में अचानक एक खिड़की सी खुली
और इक झोंका हवा का तेरी ख़ुशबू भर गया
कोई बादल टूट के बरसा मेरे अंदर कहीं
मेरी तन्हाई के गलियारों में ऑंसू भर गया
मुझको वो ऐसे मिला जैसे कोई खोया चराग़
मैंने जब उसको छुआ तो मुझमें जादू भर गया
एक गहरा सर्द सन्नाटा मेरे दिल से उठा
और फिर सारे जहाँ में आलमे-हू भर गया
दिनेश नायडू
Kya hi kahne. Waah.
ReplyDeleteBahut Shukria
Delete