सौंधी खुशबू मिट्टी की
आवाज़ें ख़ामोशी की
उजले दिन भी काले थे
हम थे शायद तारीकी
अपने ख़्वाबों की मैंने
उस चेहरे से बोहनी की
उसके हिज्र से रोशन हैं
मैं और मेरी तारीकी
शायद हो जाता सब ठीक
हमने थोड़ी जल्दी की
हार के ही मैं जीतूँगा
दुश्मन से है नज़दीकी
दिल का हाल सुनाते वक़्त
कैसे बरतें बारीकी
अश्कों ने भी छोड़ा साथ
शाम थी ऐसी उदासी की
दुनिया को सुलझाना था
उलझन हमने चाबी की
तेरे चक्कर में हमने
दिल की दुनिया ख़ाली की
दिनेश नायडू
आवाज़ें ख़ामोशी की
उजले दिन भी काले थे
हम थे शायद तारीकी
अपने ख़्वाबों की मैंने
उस चेहरे से बोहनी की
उसके हिज्र से रोशन हैं
मैं और मेरी तारीकी
शायद हो जाता सब ठीक
हमने थोड़ी जल्दी की
हार के ही मैं जीतूँगा
दुश्मन से है नज़दीकी
दिल का हाल सुनाते वक़्त
कैसे बरतें बारीकी
अश्कों ने भी छोड़ा साथ
शाम थी ऐसी उदासी की
दुनिया को सुलझाना था
उलझन हमने चाबी की
तेरे चक्कर में हमने
दिल की दुनिया ख़ाली की
दिनेश नायडू
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