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Friday, February 28, 2025

सौंधी खुशबू मिट्टी की

सौंधी खुशबू मिट्टी की
आवाज़ें ख़ामोशी की

उजले दिन भी काले थे
हम थे शायद तारीकी
 
अपने ख़्वाबों की मैंने 
उस चेहरे से बोहनी की 

उसके हिज्र से रोशन हैं 
मैं और मेरी तारीकी 

शायद हो जाता सब ठीक
हमने थोड़ी जल्दी की

हार के ही मैं जीतूँगा
दुश्मन से है नज़दीकी 

दिल का हाल सुनाते वक़्त 
कैसे बरतें बारीकी

अश्कों ने भी छोड़ा साथ
शाम थी ऐसी उदासी की

दुनिया को सुलझाना था
उलझन हमने चाबी की

तेरे चक्कर में हमने
दिल की दुनिया ख़ाली की

दिनेश नायडू

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