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Friday, April 17, 2020

मिला भी क्या मुझे लहजे में ख़ाक़सारी रख


ऐ सर्द रात ज़रा मुझमें बेक़रारी रख
सभी गुज़ारे हुए दौर बारी-बारी रख

ये शाम काटने वाले हैं साथ नज़्मों के
हम अपने सामने तस्वीर इक तुम्हारी रख

बिछड़ने वाले मिरी आखिरी गुज़ारिश है
तू अपने साथ ही मेरी ये उम्र सारी रख

वो लौट आएगा, उसको तो लौटना होगा
दिवाने अपनी सदाओं का दौर जारी रख

तमाम उम्र का प्यासा वो रेगज़ार हूँ मैं
तड़प रहा है जो आँखों में आबियारी रख

जो रात आई थी ख़ाबों की लोरियाँ गाते
चले गयी है हर इक ओर सोगवारी रख

अब उसकी ख़ाक उड़ाऊंगा धूमधाम से मैं
मिला भी क्या मुझे लहजे में ख़ाक़सारी रख

कभी “दिनेश” सितारा कोई तो टूटेगा,
तू आसमाँ की तरफ अपनी चांदमारी रख

दिनेश नायडू

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