केवल सहरा रह जाए
तेरा गम या तेरी याद
वो जाए या यह जाए
कब से अपने अंदर हूँ
काश खंडर ये ढह जाए
सबका ध्यान उसी पर है
सन्नाटा कुछ कह जाए
दिल क्यूँ गुत्थम गुत्था है
खोली इसकी तह जाए
सिर्फ़ इसी कारण चुप हूँ
बात तुम्हारी रह जाए
ऊला मिसरा, तिरा नाम
बाँधी इस पे गिरह जाए
दिनेश नायडू
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