इत्र में भीगता गुलाल मिला
उसके गालों का रंग लाल मिला
जब मैं हर तौर हो गया बर्बाद
तब मिरा जी मुझे बहाल मिला
आशियाँ की तलाश थी उसको
वो परिंदा जो डाल-डाल मिला
एक ख्वाहिश हुई थी फिर क्या था
उम्र भर का मुझे वबाल मिला
उसने हंस कर कहा कि ” तुम हो क्या ? ”
सोचने को मुझे ख़याल मिला
मेरी खुशियों पे पड़ गये डाके
किसको किसको बताओ माल मिला
हर जवाब इक नया सवाल सा है
हाय! कैसा मुझे सवाल मिला !
आ मेरे पास आ जा खामोशी
आ मेरे सुर से अपनी ताल मिला
हर कोई देखता रहा मुझको
हर कोई मुझको हमसवाल मिला
इश्क़ ने सब पे कर लिया काबू
दर्द भी इश्क़ का दलाल मिला
शह्र में तेरे था अजब मंज़र
जो मिला वो बिखेरे बाल मिला
आ मेरी जानशीन तन्हाई
मेरे होठों से अपना गाल मिला
दिनेश नायडू
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