कितना मुश्किल है किसी आँख का पानी पढ़ना
कुछ न कुछ सोचना बस सोचना यूँ ही दिन भर
और फिर रात में परियों की कहानी पढ़ना
एक ही चेहरे की बौछार है क़िस्सा अपना
मेरी आँखों से इसे दुश्मने-जानी पढ़ना
कूद जाना तिरी यादों के समंदर में फिर
डूबते डूबते मौजों की रवानी पढ़ना
आखिरी बार मुझे देखना जाते जाते
सूखी आँखों से मिरा सैले-मआनी पढ़ना
मैंने इक दौर का सावन है किया नज़्म यहाँ
तू कभी आ के मिरी आँखों का पानी पढ़ना
दिनेश नायडू
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